व्यास पूर्णिमा-विक्रम सम्वत् 2080

Shree Ram Sharnam Gwalior

श्री राम शरणम्

राम सेवक संघ, ग्वालियर

एक भरोसा, एक बल, एक आस विश्वास

05th Sep 2025

एक भरोसा, एक बल, एक आस विश्वास

परम पूज्य महाराज ने अनन्य भक्ति का मार्ग बताते हुए अपनी मुधर वाणी में कहा है- `वह राम भक्त कैसा? जो कब्र पर भी मत्था टेके और दूसरों को पूजे। पति पत्नी की तरह वह भक्त भी एक से प्रेम करे। भक्ति व्यभिचारिणी न होकर अनन्य हो। अनन्य भक्ति होने पर ऐसा नहीं कि भगवान् की कृपा की बदली आप घर बरसे। स्वप्न में भी ऐसा विचार न आवे कि कोई और मन्त्र कल्याण करेगा।
भगवान के द्वार पर जाकर, फिर अन्य द्वार खटखटाता फिरे तो शोभा नहीं देता। धारणा पक्की राम के नाम में हो। त्रिलोकी में करोड़ों मंदिर हों, जो मूर्ति अपने हृदय मन्दिर में स्थापित की, वह हमेशा आदरणीय है, अन्य इष्ट न हो। अनन्य भक्ति ही सर्वश्रेष्ठ भक्ति है, सर्वोच्च है, सर्वोत्तम है, सर्वोपरि है।
पूज्यपाद श्री स्वामी जी महाराज ने भक्ति प्रकाश में अंकित किया है-‘
एक देव की टेक है, सुदृढ़ निश्चय एक। अनन्य सुभक्ति राम में, है तज देव अनेक ।।
गोस्वामी तुलसीदास जी के एक इष्ट राम ही थे। वे अपने इष्ट के अलावा किसी दूसरे को मस्तक नहीं झुकाते थे। ऐसी दृढ़ता थी उनको अपने इष्ट में ! एक बार गोस्वामी जी वृन्दावन में श्रीकृष्ण जी का स्वरूप (मूर्ति) देख कर उन्होंने अपने इष्ट (राम) में तीव्र धारणा दर्शाते हुए कहा-
एक भरोसे एक बल, एक आस विश्वास । एक राम घनश्याम हित, चातक तुलसीदास ।।
श्री गोस्वामी जी अनन्य भक्ति का परिचय देते हुए दृढ़तापूर्वक कहते हैं-
राम-नाम छाड़ि जो, भरोसो करै और रे। तुलसी परोसो त्यागि, मांगै कूर कौर रे ।।
राम-नाम जप-यज्ञ : 2025
राम सेवक संघ, श्रीरामशरणम्, ग्वालियर द्वारा 21 दिवसीय जप-यज्ञ का आयोजन 7 सितम्बर से 27 सितम्बर तक किया जा रहा है।