संकीर्तन का आध्यात्मिक दृष्टिकोण
20th Dec 2025
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व्यास-पूर्णिमा-2025
10th Jul 2025व्यास-पूर्णिमा

व्यास-पूर्णिमा के अतीव मांगलिक पर्व तथा पवित्र दिवस पर पूज्यपाद श्रीस्वामी जी महाराज के परिवार के विश्वभर में सभी सदस्यों को हार्दिक बधाई एवं सादर अभिनन्दन ।
महर्षि व्यासदेव जी चारों वेदों के संकलनकर्ता, अठारह पुराणों एवं अध्यात्म रामायण के रचयिता हैं। मानव जाति की उनकी इस अविस्मरणीय सेवा के प्रति हम सब उनके ऋणी हैं। उस ऋण का परिशोधन हम उनके रचे ग्रंथों का स्वाध्याय तथा उनकी शिक्षाओं को आत्मसात् करके कर सकते हैं। उन्हीं मूल रचनाओं का सरल सार पूज्यपाद श्रीस्वामी जी द्वारा रचित ग्रंथों में है। अतः उनका अध्ययन तथा उन उपदेशों को आचरण में लाने का दृढ़ निश्चय ही इन आदि-गुरुओं के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। इसी से अपना उत्थान एवं मानवता का पुनरुद्धार निश्चित है।
आइये ! हम सब व्रत लें- राम-नामोपासना रूपी अग्नि द्वारा मन का शुद्धिकरण एवं अविद्या की ग्रंथियों का उच्छेदन करके शान्त, साधनामय, भक्तिमय तथा आनन्दमय जीवन व्यतीत करेंगे।
याद करो वह मानव दिवस जब श्रीस्वामी जी ने हमें नाम-दान देकर अपनाया था और गुरु-दक्षिणा के रूप में हमने उच्च स्तर द्वारा गूंजते शब्दों में सदा राम-नाम जपने तथा ध्यान में प्रतिदिन बैठने का वचन दिया था तथा अनन्य भक्ति करने का व्रत लिया था।
आइये! आज के दिन साधनामय जीवन अर्थात् पवित्र एवं ईमानदार, तपस्वी जीवन व्यतीत करने की पुनः शपथ लें। मंगल कामनाएँ! सप्रेम अभिनन्दन !
आप सबका अपना,
विश्वामित्र
प्रेषक :
श्रीराम शरणम्, रामसेवक संघ, ग्वालियर