संकीर्तन का आध्यात्मिक दृष्टिकोण
20th Dec 2025
लेख पढ़ें >
॥ पूज्यश्री प्रेम जी महाराज के निर्वाण दिवस पर विशेष ॥(29.07.2025)
29th Jul 2025॥ पूज्यश्री प्रेम जी महाराज के निर्वाण दिवस पर विशेष ॥

शक्ति प्रेम प्रकाश के, हे अनन्त भण्डार। अपने पथ में प्रेम दे, अपना पावन प्यार ।।
[पूज्यश्री प्रेम जी महाराज के बारे में पूज्यपाद श्रीस्वामीजी के कथन- सन् 1958]
‘प्रेमनाथ जी जो प्रार्थना करते हैं वह पूर्ण हो जाती है। यदि प्रार्थना अनुचित हो, तो उन्हें आवाज आ जाती है कि यह प्रार्थना अनुचित है। एक मिनिस्टर था। वह बड़ा अड़ने वाला था। उसको (प्रेम जी को) विचार आया कि वह जीवित रहे। मिनिस्टर को दिल की बीमारी थी। वह लीडर था। उसने (प्रेम जी ने) चाहा कि (वह लीडर) जीवित रहे, तो आगे जो वह अड़ जाता, वह ऐसा न करे। उसने (प्रेम जी ने) मिनिस्टर के लिये प्रार्थना की, तो प्रेम जी को आवाज आई कि ऐसी बात नहीं, कोई और बात करो। यह विचार होना चाहिये कि हमारी प्रार्थना को आगे कोई प्राप्त कर लेगा।’
पूज्यपाद श्रीस्वामी जी महाराज ने अपने जीवनकाल में ही सुपात्र शिष्य पूज्यश्री प्रेम जी महाराज को अपनी आध्यात्मिक संस्था ‘रामसेवक संघ’ का सदस्य बना लिया एवं उन्हें उच्च कोटि का साधक जानकर प्रार्थना करने का अधिकार प्रदान किया।

पूज्यश्री प्रेम जी महाराज प्रतिवर्ष होली पर्व पर दिल्ली में प्रार्थनाशील साधकों व रामसेवक संघ के सदस्यों की बैठक कर उन्हें उचित दिशा-निर्देश दिया करते थे। पूजनीय गुरुजनों के आशीर्वाद से ‘सामूहिक प्रार्थना’ की परम्परा आज भी नियमित रूप से जारी है।
[राम सेवक संघ, ग्वालियर के वरिष्ठ साधक की धरोहर से]