व्यास पूर्णिमा-विक्रम सम्वत् 2080

Shree Ram Sharnam Gwalior

श्री राम शरणम्

राम सेवक संघ, ग्वालियर

संकीर्तन का वैज्ञानिक दृष्टिकोण

13th Dec 2025

संकीर्तन का वैज्ञानिक दृष्टिकोण

ध्वनि-शक्ति के रूप में शब्द-शक्ति को लेज़र से भी अधिक सामर्थ्यवान एवं शक्तिपुंज माना गया है। जो कुछ भी हम सोचते हैं उसका विनाश नहीं होता वरन् यह सूक्ष्म तरगों के रूप में हमारे चारों ओर उमड़ता-घुमड़ता रहता है और अनन्त काल तक अस्तित्व बनाये रखता है।
इस सम्बन्ध में फ्रांस के मूर्द्धन्य वैज्ञानिक वाल्दीमीर गौब्रियू ने लम्बे अध्ययन अनुसंधान के बाद बताया कि निश्चित आवृत्ति वाली ध्वनि के सम्पर्क क्षेत्र में जब व्यक्तियों को नियमित रूप से कई दिनों तक बिठाया गया तो पाया कि उनकी मानसिक क्षमता में असाधारण रूप से परिवर्तन दृष्टिगोचर हुआ।
इसी आधार पर जब हम ऐसे क्षेत्र में जहाँ मात्र ईश्वर संकीर्तन, ईश्वर चर्चा ही की ध्वनि तरंगें हों, वहाँ हम जाते हैं तो हमारे मस्तिष्क पर उनका प्रभाव पड़ता है, क्योंकि यदा-कदा वातावरण में उपस्थित सूक्ष्म तरंगें जब हमारे मस्तिष्क की पकड़ में आ जाती हैं तो निश्चित ही अपना प्रभाव दिखाती हैं। यही कारण है कि आध्यात्मिक परिवेश न होने पर भी अनेक लोगों को ऐसी जगह जाने पर शान्ति का अनुभव होता है। ऐसा अनेक नवीन साधकों ने अनुभव किया है।
सामूहिक सत्संग का महत्व
पूज्यपाद श्री स्वामीजी महाराज का कथन है-संगीत में मोहक शक्ति है। संगीत और सभ्यता का बड़ा सम्बन्ध है। राग में बल होता है कि वह मनुष्य के जीवन को पलटा देता है। ऐसा शास्त्रों से विदित होता है कि जहाँ संकीर्तन होता है वहाँ सूक्ष्म रूप से कई दैवीय शक्तियाँ- ऋषि, मुनि, सिद्ध संकीर्तन सुनने के लिए आते हैं।
जिस प्रकार रेडियो के किसी स्टेशन पर शक्तिशाली ट्रांसमीटर होने की वजह से उसके आस-पास के छोटे स्टेशन उसी के माध्यम से ध्वनि ग्रहण कर प्रसारण कर देते हैं। इसी प्रकार यदि सामूहिक सत्संग में किसी साधन-सम्पन्न व्यक्ति का वहाँ उपस्थित किसी दैवीय शक्ति द्वारा आत्मसात संयोग यदि श्री प्रभु से हो जाता है तो उसके माध्यम से वहाँ उपस्थित अन्य साधक भी ध्वनि तरंगों के माध्यम से उस रसानुभूति को पाते हैं।
पूज्यपाद श्री स्वामी जी महाराज द्वारा प्रतिपादित यह नाम संकीर्तन परम्परा आज भी श्री माधव सत्संग आश्रम – श्रीराम शरणम् ग्वालियर (छत्री प्रांगण में स्थित) में यथावत है, जहाँ हजारों भक्तगण लाभान्वित होकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
– डॉ. श्रीमती सरिता सिंह
प्रेषक : श्रीरामशरणम्, रामसेवक संघ, ग्वालियर