व्यास पूर्णिमा-विक्रम सम्वत् 2080

Shree Ram Sharnam Gwalior

श्री राम शरणम्

राम सेवक संघ, ग्वालियर

साधना-सत्संग, ग्वालियर(14 से 17 नवम्बर, 2025) में साधकों के भेजे गये अनुभव

26th Nov 2025

साधना-सत्संग, ग्वालियर(14 से 17 नवम्बर, 2025) में साधकों के भेजे गये अनुभव

दिनांक 14 नवम्बर से 17 नवम्बर, 2025 तक श्रीरामशरणम्, ग्वालियर द्वारा तीन-रात्रि साधना-सत्संग का दिव्य आध्यात्मिक साधना-सत्संग पूज्य गुरुजनों के आशीर्वाद से सानन्द सम्पन्न हुआ। इस बार साधना-सत्संग हेतु स्थानीय तथा बाहर से साधक/साधिकाओं के अत्यधिक संख्या में नाम आये जितने कि पूज्यश्री महाराज जी के समय आया करते थे। तीन-रात्रि साधना-सत्संग, ग्वालियर के उच्च अनुशासन की परम्परा, जोकि श्रीराम शरणम् ग्वालियर की पहचान है, को साधकों ने कायम रखा।
श्रीराम-कृपा एवं पूज्य गुरुजनों के आशीर्वाद से श्रीरामशरणम्, ग्वालियर में पूज्यपाद श्री स्वामी सत्यानन्द जी महाराज के उद्देश्य की पूर्ति हो रही है, वृद्धि आस्तिक भाव की हो रही है, शुभमंगल संचार हो रहा है, सद्धर्म का उदय हो रहा है तथा राम-नाम का विस्तार हो रहा है।

साधकों के भेजे गये अनुभव

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सांसों की माला से सिमरूं मैं तेरा नाम !

पूज्यपाद श्री स्वामी जी महाराज ने श्री अमृतवाणी में लिखा है- सांस-सांस से सिमर सुजान। यह पंक्ति पढ़कर इच्छा जागृत होती थी कि मेरे जीवन में ऐसा समय कब आएगा कि मेरा भी सिमरन इस लेवल का हो सके। परमेश्वर कृपा से यह शुभ संयोग बना साधना-सत्संग, ग्वालियर में, जहाँ तीन-रात्रि के 62 घंटे अर्थात् 3,720 मिनट अर्थात् 2,23,200 सेकंड साँसों की माला से सिमरन हुआ।
इस बार के साधना-सत्संग में भाग लेने से पूर्व ही मैंने यह संकल्प लिया था कि एक क्षण एक पल भी व्यर्थ नहीं गंवाना है। इन तीनों दिवसों के अमूल्य समय में प्रत्येक सांस से सिमरन करना है। दुविधा यह थी कि दिनभर में तो सिमरन हो जाता है परन्तु रात में नींद के समय सिमरन कैसे हो ? जब हम सद् संकल्प लेते हैं तो परमेश्वर हमारे सहायक होते हैं। यह दुविधा भी पूज्यश्री स्वामी जी महाराज ने श्री अमृतवाणी-पाठ से सुलझाई- ‘सपने में भी न बिसरे राम ।’ बस फिर क्या था परमेश्वर ने सपने में भी राम-नाम का विस्मरण न होने दिया। राम जी ने सोने ही नहीं दिया। कभी हल्की नींद लग भी गई तो हड़बड़ाहट में अपने-आप को जगाया-अरे! अभी नहीं सोना, घर जाकर सोना है। सिमरन को compensate करने के लिए और तेजी से राम-नाम जपा। अर्द्धनिद्रा-अर्द्धजागृत अवस्था में भी राम-नाम की माला अन्तःकरण में चलती रही। जाप-सिमरन ऐसा हुआ कि राम-नाम की वह अवस्था मिली जब “साँस-साँस नस-नस से रसे।”
ऐसे दयालु कृपालु हैं परमेश्वर ! भक्त के संकल्प को स्वयं पूर्ण कराते हैं। परमेश्वर ने ऐसा सुन्दर अवसर प्रदान कर कृतार्थ किया।
धन्यवाद तेरा प्रभु, तू दाता सुख भोग !
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सभी को जय जय राम, मुझे राम जी की कृपा से पहली बार साधना सत्संग में शामिल होने का मौका मिला। बहुत ही अ‌द्भुत और अलौकिक अनुभव हुआ। बहुत ही सुकून देने वाली अनुभूति हुई।
हमारे पूजनीय गुरुजन की उपस्थिति महसूस होती है। सभी आयोजकों के हम आभारी हैं जिनके अथक प्रयास से हम सभी के जीवन में नयी ऊर्जा और सकारात्मकता आयी, सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ और धन्यवाद। जय जय राम !
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My experience at Sadhna Satsang
(1) The regularity with which “Dhyaan” and “Jaap” is conducted during Sadhna Satsang is like providing training to saadhak on the know-how of spirituality. The discipline of timing was also adhered to and teaches one a lot about punctuality and self-discipline.
(2) The simplicity of food and stay arrangements is also a guide into self-restraint. Such basic meals and living arrangements ensure that the focus of the saadhak remains on “Dhyaan” and “Jaap” and there are least distractions in the surroundings and the day to day happenings in the ashram premise.
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Ram Ram to all the Gurujan and Sadhakjan. We gained inspiration from the culture of Sadhana Satsang that through this Sadhana we can make ourselves self-reliant. We also experienced and understood that discipline, service, and love bring happiness into one’s life.
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राम जी की कृपा से तीन-रात्रि (14 नवम्बर से 17 नवम्बर, 2025) साधना-सत्संग, ग्वालियर में भाग लेने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। आचार्य श्री (डॉ.) पचौरी साहिब ने अपने व्याख्यान में साधना-सत्संग की प्रत्येक बैठक की महत्ता के बारे में समझाया। तब ज्ञात हुआ कि पूज्यश्री स्वामी जी महाराज द्वारा बनाए गए साधना-सत्संग के टाइम टेबल की प्रत्येक बैठक का क्या गूढ़ रहस्य है तथा विशेष महत्व है।
आरती की समापन बैठक का इसमें सर्वोच्च स्थान है। पूज्यश्री महाराज जी कहा करते कि आरती की बैठक के लिए सभी को सुबह से ही गंभीर रहना चाहिए। यह बैठक पूरे साधना-सत्संग का निचोड़ है। इस समय हम सीधे परमात्मा के दरबार में प्रार्थना कर रहे होते हैं। आरती की जोत जिसमें सारे साधना-सत्संग का पुण्य समाहित है, परमेश्वर के दरबार में की गई प्रार्थना, उनकी आरती करना, उस ज्योति को अपने अन्तःकरण में संजोना तथा परमात्मा का प्रसाद प्राप्त करना इत्यादि उस समय प्रत्येक क्रिया में भावना का स्तर सर्वश्रेष्ठ होता है।
ऐसी जीवन्त आरती का कार्यक्रम मैंने पहली बार देखा तो हृदय द्रवित हो उठा। अभी तक वीडियो द्वारा पूज्यश्री महाराज जी को आरती करते देखा था। Live experience बहुत भावनाप्रधान लगा।
प्रार्थना एवं आरती- जिस परमात्मा (श्री अधिष्ठान जी) के समक्ष इन दिनों में हमने साधना की है, तप किया है, उस परम ब्रह्म परमात्मा की आरती उतारी जानी चाहिए। रिकॉर्ड वीडियो में ऐसा प्रतीत नहीं होता।
आरती की जोत- हमारी साधना का पुण्य प्रताप उस ज्योति में है जिसे हम प्रणाम करते हैं तथा अपने घट मंदिर में स्थापित करते हैं, जो हमारे बीच घुमाई जाती है। अब हरिद्वार में जोत साधकों के मध्य घुमाई ही नहीं जाती।
प्रसाद- जब मंदिर में हम प्रसाद स्वयं नहीं लेते, ऐसे ही गुरुद्वारे में लंगर परोसा जाता है, प्रसाद दिया जाता है, अपने आप उठाया नहीं जाता। यहाँ जब समाप्ति पर प्रसाद हाथ में दिया गया तो लगा “साधना करके मैंने आज कुछ विशेष पाया है, अपने-आप को शाबाशी देने का मन किया।”
विदाई- बार-बार मिले राम मेला सजनां दा! सुनकर ऐसा लगा जैसे कलेजा बाहर को आ जाएगा।
पूज्यश्री महाराज जी के कथनानुसार समझ आया कि इन भावुक, मार्मिक बैठक के क्षणों तथा क्रियाओं का विशेष महत्व है, यह साक्षात् अब समझ आया। मैं हर वर्ष साधना-सत्संग, ग्वालियर में भाग अवश्य लूंगा।
आध्यात्म में स्वयं अनुभव करना, रोमांचित होना तथा आन्तरिक सुख प्राप्त करने की प्रथा है। जहाँ यह प्रथा अपनाई नहीं जा रही वहाँ साधकों को वंचित रखा जा रहा है। उन्हें इसके बारे में सोचना चाहिए कि वे क्या खो रहें हैं ?
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जय जय राम सर, श्री माधव सत्संग आश्रम ग्वालियर में 14 नवम्बर से 17 नवम्बर, 2025 तक आयोजित तीन-रात्रि साधना-सत्संग में मुझे परमात्मा श्रीराम के नाम का जाप, ध्यान और सत्संग का बहुत अद्भुत आनंद की अनुभूति प्राप्त हुई, परमात्मा श्रीराम के नाम जाप और ध्यान मैं नित्य आदरणीय गुरुजनों और दीदी के बताये मार्गदर्शन के अनुसार करता रहूंगा।
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उद्याम-कीर्तन
अहो ! मस्ताना मैं हुआ, पाकर हरि अनुराग। लगन, प्रेम और ध्यान में, रहूं खेलता फाग ॥
श्री माधव सत्संग आश्रम, ग्वालियर में आयोजित साधना-सत्संग में शाम के ध्यान के पश्चात् उद्याम कीर्तन में लगी धुनों ने राम-नाम की ऐसी मस्ती और खुमारी चढ़ा दी जो अवर्णनीय है। सभी पुरुष साधक अपने देहभान को भूलकर बस धुन की मस्ती में मग्न थे जबकि महिला साधक बैठे-बैठे ही मन ही मन नृत्य कर रहीं थीं। वरिष्ठ साधकों ने बताया कि पूज्यश्री प्रेमजी महाराज ध्यान के पश्चात् कोई धुन (जैसे-परम गुरु जय जय राम) लगाते थे जोकि निरन्तर आधा घन्टा चलती थी। पूज्यश्री प्रेमजी महाराज साधकों को हाथ पकड़कर उठाते जाते, उनका हाथ लगते ही साधक को आवेश आ जाता और साधक धुन में मस्त होकर आनंदित होते थे। बेसुध, बेखबर, अपना पद, नाम भूलकर सभी राम-नाम की मस्ती में मग्न हो जाते। ऐसी ही मस्ती हमें भी उद्याम कीर्तन में प्राप्त हुई।
यह उद्याम कीर्तन ग्वालियर श्रीरामशरणम् के साधना-सत्संग का एक अनूठा भाग है जोकि पूज्यपाद श्री स्वामी महाराज के समय से प्रारम्भ होकर, पूज्यश्री प्रेम जी महाराज तथा पूज्यश्री महाराज जी के समय भी निरन्तर होता रहा। इस ऊर्जावान कीर्तन की परम्परा को यहाँ के साधकों ने यथावत् कायम रखा है।
मैं नाची, मेरा सतगुरु नाचा !
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ग्वालियर साधना सत्संग-हमारा दिव्य अनुभव
ग्वालियर में आयोजित श्री रामशरणम् में साधना-सत्संग में सम्मिलित होना मेरे और मेरे परिवार के लिए एक अत्यन्त दिव्य, शांतिपूर्ण और जीवन को बदल देने वाला अनुभव रहा। सत्संग का पावन वातावरण, प्रभु नाम जप, भजन-अमृतवाणी और आध्यात्मिक तरंगों ने मन को असीम शान्ति और नई ऊर्जा से भर दिया। जैसे रविवार का विश्राम शरीर को सप्ताह भर के लिए ताजगी देता है, वैसे ही इस सत्संग ने हमारे मन, आत्मा और चेतना को पूरे वर्ष के लिए नया प्रकाश और शांति प्रदान की। मेरे अनुभव में ग्वालियर का यह सत्संग स्थल अत्यन्त पवित्र और प्रेरणादायी है, जहाँ जीवन में कम से कम वर्ष में एक बार अवश्य जाना चाहिए। मेरी पत्नी पहली बार इस सत्संग में शामिल हुई और उनका अनुभव अत्यन्त सकारात्मक और आध्यात्मिक रहा। वे स्वयं को ऊर्जावान, धन्य और प्रभु की अनुकंपा से भरा हुआ महसूस कर रही थीं।
हम वर्षों से प्रतिदिन माला जाप करते थे, पर इस बार अनुभव हुआ कि वास्तविक आध्यात्मिक उन्नति के लिए ध्यान भी उतना ही आवश्यक है। सत्संग की प्रेरणा से अब हमने प्रतिदिन ध्यान को भी अपनी दिनचर्या में शामिल कर लिया है और उसका सुंदर व सकारात्मक परिवर्तन जीवन में स्पष्ट दिखाई दे रहा है। आज हम प्रतिदिन सुबह और शाम एक-एक घंटा ध्यान, माला और अमृतवाणी के लिए समर्पित करते हैं, जिससे हमारे जीवन मे सुंदर और पवित्र बदलाव आ रहे हैं। हम सदैव कृतज्ञ रहेंगे कि रामशरणम् सत्संग ने हमें एक अधिक अनुशासित, जागरूक और आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। जय जय राम जी।
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सर्वप्रथम श्री स्वामी सत्यानंद जी के चरणों में हमारा बारम्बार नमस्कार और उन सभी आयोजकों का आभार जिन्होंने हमें इस साधना-सत्संग में सम्मिलित होने के लिए प्रेरित किया।
उपरोक्त श्रीरामशरणम् सत्संग में सम्मिलित होने के उपरान्त मैं अपने शरीर में एक अजीब सी ऊर्जा का अनुभव कर रहा हूँ। पहले मैं एक जगह 30 मिनिट से अधिक बैठ भी नहीं पाता था, स्वास्थ्य कारणों की वजह से। परन्तु जब से मैं सत्संग हॉल में बैठा हूँ या जाप कक्ष में जाप किया तो मेरी यह क्षमता स्वामी जी महाराज के आशीर्वाद से अपने-आप बढ़ गई। ग्वालियर से लौटने के बाद अब जब मैं घर पर पाठ करने या जाप के लिए बैठता हूँ तो आराम से सवा घंटे तक बैठ पा रहा हूँ और ये समय और भी बढ़ जाएगा राम-कृपा से ऐसा मुझे लगता है। सत्संग में हमने अनुशासन, सौहार्दपूर्ण आचरण, ध्यान, जाप, अमृतवाणी एवं अन्य ग्रंथों का पाठ करने का नियम आदि सीखा जो अब हमने हमारे नित्य कार्यों में सम्मिलित कर लिया है।
जब से हम साधना-सत्संग, ग्वालियर के भक्तिपूर्ण वातावरण से वापस लौटे हैं ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे शरीर तो हमारा यहाँ आ गया है पर आत्मा एवं हृदय वहीं आश्रम में रह गए हैं। अंत में मैं यही कहना चाहता हूँ कि श्री रामशरणम् ग्वालियर सत्संग में सम्मिलित होकर हमें हमारे जीवन का लक्ष्य प्राप्त हो गया है। जय जय राम जी।
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राम राम जी, श्री माधव आश्रम, ग्वालियर साधना-सत्संग मे श्री सद्‌गुरु और परमात्मा श्रीराम जी की असीम कृपा से साधना सत्संग में जाने का अवसर प्राप्त हुआ। ऐसे साधना-सत्संग में सम्मिलित होना, श्री सद्‌गुरु और परमात्मा श्री राम जी की कृपा से ही संभव है। ध्यान, सुमधुर भजन संकीर्तन, नाम जाप, अमृतवाणी विनोद सभा और सुबह 10 बजे का विशेष ध्यान साक्षात् ऐसे अनुभव हो रहा था कि अपने गुरुजन और प्रभु श्रीराम अपने साथ में विराजमान हैं, अपार आनंद आ गया। समय से सोना, समय से जागना, सब कार्य समय से करना, ऐसे श्री सद्‌गुरु के दरबार में बहुत आनंद आया। यही साधक की सच्ची साधना है। मुझे ऐसे साधना सत्संग मे बार-बार जाने का सुअवसर मिले ऐसी श्रीराम एवं श्री सद्‌गुरु से प्रार्थना है।
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जय जय राम जी, ग्वालियर के श्री माधव आश्रम में त्रिदिवसीय साधना-सत्संग में गुरुजनों व श्रीराम जी की कृपा से सम्मिलित होने का सुअवसर प्राप्त हुआ। मर्यादा पूर्वक गरिमामय वातावरण में साधना करने में बहुत आनन्द की अनुभूति हुई। आदरणीय दीदी का मार्गदर्शन मिला, सीनियर साधक श्री पचौरी जी का सारगर्भित अनुभव मिला। गुरुजनों की सूक्ष्म उपस्थिति की अनुभूति में ध्यान की बैठक सम्पन्न हुई। ऐसा लग रहा था कि गुरुजन के सानिध्य में सत्संग चल रहा है। जाप कक्ष में बैठकर जाप करने में विशेष आनन्द आया। जैसे किसी यंत्र की बैटरी डिस्चार्ज होती है और उसे रिचार्ज करना पड़ता है, इसी प्रकार साधना सत्संग हम सभी साधक के लिए चार्जर हैं जो हमें आध्यात्मिक ऊर्जावान बनाता है, नम्र बनाता है, सेवक बनाता है। मैं प्रभु श्रीराम व गुरुजनों से करबद्ध प्रार्थना करता हूँ कि यह अवसर बार-बार प्रदान करते रहें।
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Ram Ram Ji, I am very happy to have received the Naam Diksha & participated in the Sadhana Satsang. I will always follow all the instructions as given by respected Jyotsana Didi. Incredible, Magnificent and Spectacular experience I gained!
प्रेषक : श्रीराम शरणम्, रामसेवक संघ, ग्वालियर