संकीर्तन का आध्यात्मिक दृष्टिकोण
20th Dec 2025
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सन्त-पथ के अनुसार- नाम दीक्षा
12th Jul 2025सन्त-पथ
पूज्यपाद श्री स्वामीजी महाराज के अनुसार-सूक्ष्म जगत् में दीक्षा तीन प्रकार से होती है- दृष्टि, स्पर्श तथा शब्द (नाद)।
रामानंद ने कर दया, देखा भक्त कबीर। ——दृष्टि
नाम सुदीक्षा दान कर, उस का हुआ शरीर । —- स्पर्श
पूरा उस के कान में, राम राम शुभ नाद। —— शब्द (नाद)
आशीर्वाद दे कर तब, उस के हरे विषाद ।
उत्तम गुरु को लाभ कर, भज कर राम सुनाम। हर्षित हुआ कबीर तब, योगी पूर्ण काम।।
[भक्ति-प्रकाश से]
महान संत रामानन्द जी ने भी इसी पद्धति द्वारा भक्त कबीर को नाम-दीक्षा दान कर संत कबीर बना दिया। यही पूज्यपाद श्री स्वामीजी महाराज की विशुद्ध नाम-दीक्षा पद्धति है। भक्ति-प्रकाश ग्रन्थ में पूज्य श्री स्वामीजी महाराज ने खण्ड भक्त-प्रकाश में भक्तों को प्राप्त नाम-दान को इसी प्रकार वर्णित किया है।
श्री रामानन्द जी आदि मूल वीतराग महात्मा हुये हैं। उन्होंने नाम की दीक्षा का मार्ग चलाया। उन्हीं के बारह शिष्यों में से श्री कबीर दास जी तथा रविदास जी (रैदास) हुये हैं जिनसे सन्त मत का प्रचलन हुआ। श्री गोस्वामी तुलसीदास जी भी श्री रामानन्द जी की परम्परा में हुये, जिन्होंने भक्ति को महत्व दिया। सन्तों ने केवल नाम का प्रचार किया। उनके कथन में बड़ी शक्ति थी। वे परम-पद से जुड़े हुये थे। [प्रवचन-पीयूष से]
पलड़े सांसों सांस के, दोनों कर ले ठीक। गुरुमुख से ले शब्द को, होता जा सदा निर्भीक ।।
प्रेषक :
श्रीराम शरणम्, रामसेवक संघ, ग्वालियर