व्यास पूर्णिमा-विक्रम सम्वत् 2080

Shree Ram Sharnam Gwalior

श्री राम शरणम्

राम सेवक संघ, ग्वालियर

पतित-पावन नाम है- ‘राम’ [2]

01st Jul 2025

पतित-पावन नाम है- ‘राम’ [2]

पूज्यपाद श्री स्वामी जी महाराज लिखते हैं-जैसे सजीव पेड़ को फल और बीज लगा करता है ऐसे ही ईश्वर-कृपा तथा अनुभवी सज्जन से ग्रहण किया हुआ नाम ही ध्यान, एकाग्रता, समता और समाधि का साधन बना करता है।
अर्थात् ईश्वर-कृपारूपी वृक्ष का फल है-अनुभवी सज्जन का समागम। ईश्वर-कृपा के बिना अनुभवी सज्जन नहीं मिलते और जहाँ-तहाँ से, किसी यन्त्र अथवा इलैक्ट्रोनिक माध्यम से ग्रहण किये हुए नाम से आध्यात्मिक लाभ नहीं मिलता। जिस प्रकार मिट्टी के बनाए हुए फल या बीज कई बार वास्तविक फलों और बीज जैसे ही दिखाई देते हैं किन्तु उन फलों में वह स्वाद कभी नहीं आ सकता तथा ऐसे ही बनावटी बीजों को बोने से कोई शुभ परिणाम नहीं निकल सकता। अतः नाम सदा किसी अनुभवी सज्जन से ही लेना चाहिये, जो साधन-सम्पन्न हो, योग्य हो, जिसे नाम-दीक्षा की सही विधि ज्ञात हो। ऐसे अनुभवी सज्जनों से ग्रहण किया हुआ नाम ही फलदायी होता है तथा ध्यान, एकाग्रता समता और समाधि की अवस्था लाभ कराता है।
पूज्यपाद श्रीस्वामी जी महाराज द्वारा विरचित भक्ति-प्रकाश के खण्ड भक्त-प्रकाश में महान संतों, भक्तों, जीवन्मुक्त, ज्ञानी तथा वीतरागी सज्जनों का वर्णन है। प्रत्येक पाठ में प्रत्येक भक्त को नाम-दीक्षा कैसे, किससे तथा किस विधि द्वारा प्राप्त हुई उसके बारे में पूज्यश्री स्वामी जी महाराज ने बहुत सुन्दरता से वर्णन किया है। अतः यह स्पष्ट है कि वेदानुसार तथा शास्त्र द्वारा बताई गई विधि अनुसार मंत्र धारण करके, नाम-दीक्षा ग्रहण करके ही वे सज्जन महान भक्तों की श्रेणी में आए।
अविधिपूर्वक ली गई नाम-दीक्षा वैसे ही है जैसे मिट्टी के बने फल-फूल, बीज तथा तस्वीर में बनी गाय जोकि सजीव वस्तु का संकेत तो करते हैं परन्तु हैं पूर्णतया निरर्थक, निष्फल तथा निष्प्रभावी।
गुरुमुख से जब ही मिले, शब्द नाम अनमोल । वृत्ति, ध्यान समाधि में, होकर रहे अडोल ।। [भक्ति प्रकाश]
[विद्याभास्कर, कविरत्न, साहित्याचार्य, आदरणीय श्री अमीरचन्द शास्त्री जी द्वारा वर्णित एक लेख से उद्धृत]
प्रेषक : श्रीराम शरणम्, रामसेवक संघ, ग्वालियर